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कांग्रेस छोड भाजपा में हुए शामिल सांसद सतपाल महाराज
By admin On 21 Mar, 2014 At 04:23 AM | Categorized As Cities, Political party | With 0 Comments

कांग्रेस छोड भाजपा में हुए शामिल सांसद सतपाल महाराज राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल, रावत सरकार को खतरा हरीश रावत ने कहा मेरी सरकार को खतरा नही
बहुगुणा ने कहा-राज्य में राजनीतिक अस्थिरता कायम

सुनील दत्त पांडेय
देहरादून 21 मार्च। उत्तराखंड के संसदीय क्षेत्र पौड़ी गढ़वाल से कांगे्रस के सांसद सतपाल महाराज ने आज कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। सतपाल महाराज के समर्थकों ने दावा किया है कि उनके साथ एक दर्जन कांग्रेसी विधायक हैं। जो किसी •ाी वक्त कांग्रेस छोड़कर •ााजपा का दामन थाम सकते हैं। सतपाल महाराज के इस कदम से हरीश रावत की डेढ महीने पुरानी कांग्रेस सरकार खतरे में पड़ती हुई दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक सतपाल महाराज की पत्नि और राज्य सरकार की कैबिनेट मंत्री अमृता रावत के नेतृत्व में भाजपा राज्य में सरकार बनाने के प्रयासों में लगी हुई है। उधर हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नही है। निर्दलीय और बसपा के बागी तथा उत्तराखंड क्रांति दल के सात विधायकों का समर्थन सरकार को हासिल है। वहीं सतपाल महाराज के समर्थकों का दावा है कि निर्दलियोें और बसपा और यूकेडी के विधायक जल्दी ही रावत सरकार अपना समर्थन वापिस ले लेंगे। सतपाल महाराज ने कहा कि रावत सरकार राज्य की जनता और कांग्रेस के वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं का लगातार अपमान कर रही थी। रावत ने मंत्रियों के वि•ाागों के बटवारों के वक्त सतपाल महाराज की पत्नि अमृता रावत से उद्यान वि•ााग छीन लिया था, और उन्हें ऊर्जा वि•ााग •ाी नहीं दिया था। जिससे सतपाल महाराज, अमृता रावत और उनके समर्थक हरीश रावत से बुरी तरह चिढ गये थे। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के यहां •ाी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। माना जा रहा है सतपाल महाराज ने जो राजनीतिक •ाूचाल पैदा किया उसके पीछे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी की महत्व पूर्ण •ाूमिका है। तिवारी सोनिया गांधी से मिलने के लिए तीन दिन तक दिल्ली रहे परंतु सोनिया गांधी ने तिवारी को मिलने के लिए वक्त नहीं दिया। तिवारी सोनिया गांधी से नाराज होकर आज हल्द्वानी पहुंच गये। और वे हफते •ार रूककर नैनीताल, अल्मोडा तथा अन्य संसदीय क्षेत्रों का राजनीतिक हालातों का जायजा लेंगे।
जहां एक ओर हरीश रावत समर्थक सतपाल महाराज को •ााजपा में जाने पर कोस रहे है वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि सतपाल महाराज को मनाने के प्रयास कांग्र्रेस के प्रदेश नेताओं ने गं•ाीरता से नहीं किए और उनका सम्मान नहीं रखा गया। बहुगुणा समर्थक विधायक सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में यह राजनीतिक हालात नैतृत्व परिवर्तन के कारण पैदा हुए। सतपाल महाराज इतने गुपचुप तरीके से •ााजपा में गए कि हरीश रावत की सरकार का खुफिया तंत्र बुरी तरह फेल हो गया। सतपाल महाराज ने कहा कि उनकी पत्नि कांग्रेस में रहने के लिए स्वतंत्र है। सतपाल महाराज के इस राजनीतिक फैसले से रावत सरकार की चूले हिल गई है। राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई है। रावत सरकार के अस्तित्व को लेकर राज्य में तरह-तरह की अटकलें लग रही है। •ााजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि रावत सरकार राख के ढेर पर बैठी हुई है। सतपाल महाराज के कांग्रेस छोडने से कांग्रेस में अफरा-तफरी का माहौल है। टिकट बटवारे से पहले ही कांग्रेस में •ागदड़ मच गई है। जिसका •ाारी राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को लोकस•ाा चुनाव में •ाुगतना पडेगा। अब राज्य में लोकस•ाा चुनाव के दौरान कांग्रेस की सं•ाावनाएं बहुत कम रह गयी है। और •ााजपा मनोबल बहुत बढा हुआ है। सतपाल महाराज 1996 में •ाी कांग्रेस से बगावत कर तिवारी कांग्रेस में शामिल हो गए थे। देवगोडा और गुजराल सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे, परंतु उन्हें सोनिया और राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार में जगह नहीं दी। जिससे सतपाल महाराज बहुत आहत थे। उपर से सोनिया-राहुल ने उनके धुरविरोधी हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाकर सतपाल महाराज को चिडा दिया। और हरीश रावत ने उनकी पत्नि अमृता रावत से उद्यान वि•ााग छीनकर आग में घी डालने का काम किया। इस तरह सतपाल महाराज कांग्रेस में लगातार अपनी उपेक्षा महसूस कर रहे थे। सतपाल महाराज इस राजनीतिक कदम के दूरगामी परिणाम राज्य की राजनीति में आगे देखने को मिलेंगे। हरीश रावत मुख्यमंत्री बनने के डेढ महीने बाद •ाी कांग्रेस को एकजुट नहीं रख पाए। जिससे रावत की सरकार की धाक एकदम कम हो गई है। उधर बदले राजनीतिक हालात में पीडीएफ के सात विधायकों ने कहा कि वे अब राज्य की सरकार को जारी समर्थन के बारे में फिर से विचार करेंगे। अब सरकार पर पीडीएफ विधायकों का दबाव बढ जाएगा। सतपाल महाराज ने कहा कि वे हरीश रावत सरकार को गिराने का काम नहीं करेंगे। यह सरकार खुद-ब-खुद अपने बोझ से गिर जाएगी। सतपाल महाराज ने कहा कि उनका लक्ष्य नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है। उनका कांग्रेस में कोई आका नहीं था और उनकी कांग्रेस में लगातार उपेक्षा हो रही थी। राज्य में आपदा के बाद हालात बहुत बिगड गये है। राज्य की जनता अपने को असुरक्षित महसूस कर रही है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार पलायन हो रहा है। सरकार को   इसकी कोई चिंता नहीं है। दूसरी और मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली से शाम को देहरादून पहुंचे। और अपने समर्थक विधायकों से सम्पर्क किया। हरीश रावत ने कहा कि सतपाल महाराज पहले ही •ााजपा में जाने का मन बना चुके थे। इस सारे कांड से कांग्रेस की उत्तराखंड प्र•ाारी अंबिका सोनी की •ाी खासी किरकिरी हुई है। वे सतपाल महाराज के •ााजपा में जाने की खबर से बेखबर रही। अब अंबिका सोनी •ाी सांप निगल जाने के बाद लकीर पीट रही है।

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