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गंगा अवतरण-एक कथा
By Gaurav Kashyap On 28 Dec, 2017 At 10:45 AM | Categorized As Religion | With 0 Comments

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डॉ प्र​दीप जोशी,  ज्योतिषाचार्य

गंगा सागर के कारण ही स्वर्ग से गंगा धरती पर अवतरित हुई। गंगा सागर के पास स्थित कपिल मुनि के आश्रम में राजा भागीरथ और भगवान रामचंद्र जी के पुरखों को तारने के लिए ही गंगा पृथ्वी पर आई। भगवान विष्णु के अवतार कपिल मुनि के श्राप से राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे। सगर के पुत्रों को तारने के लिए गंगा जी को कठोर तप करके देवभूमि उत्तराखंड के गौमुख से गंगा सागर में स्थित ​कपिल मुनि के आश्रम तक राजा भागीरथ लेकर आए। राजा भागीरथ सगर के वंश के थे।

राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ करवाया था और अश्वमेघ यज्ञ का घोडा राजा सगर ने भारत भ्रमण के लिए छोडा था। इंद्र ने ईश्र्यावश राजा सगर के अश्वमेघ यज्ञ को भंग करने के लिए षडयंत्र के तहत भारत भ्रमण के लिए छोडे गए घोडे को कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। घोडे को ढूढंते हुए राजा सगर साठ हजार पुत्र ​कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे तो उन्होंने आश्रम में अश्वमेघ यज्ञ का घोडा बंधा हुआ देखा। राजा सगर के पुत्रों ने कपिल मुनि पर अश्वमेघ यज्ञ का घोडा रोकने पर कई लांछन लगाए। गुस्से से क्रोधित ​कपिल मुनि ने राजा सगर के पुत्रों को श्राप देकर भस्म कर दिया। अपने पुत्रों को ढूंढते हुए राजा सगर कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे तो उन्होंने वहां पर अपने साठ हजार पुत्रों के भस्मि अवशेष देखे तो उन्होंने ऋषि कपिल मुनि से क्षमा मांगी और अपने पुत्रों को तारने के लिए कपिल मुनि से उपाय पूछा तो कपिल मुनि ने राजा सगर को स्वर्ग से गंगा को पृथ्वी पर लाने और गंगा के पवित्र जल से उनके पुत्रों को तारने के लिए कहा। राजा सगर और उनके वंश के कई राजाओं ने गंगा को धरती पर आने के लिए कई हजार वर्षों तक तप किया। आखिरकार राजा सगर के वंशज अपनी कठोर तपस्या से गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफल हुए। कपिल मुनि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। कपिल मुनि ऋषि करदम की संतान थे।

ब्रह्मा कमण्डल से और भगवान विष्णु के श्रीचरणों और भगवान शंकर की जटाओं से होते हुए गंगा धरती पर आई। राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को तारने के लिए जिस दिन गंगा दो हजार पचास किलोमीटर का सफर तय करती हुई गंगा सागर में आई। उस दिन मकर संक्रांति थी। मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। और सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आते हैं। यानि सूर्य भगवान दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में स्नान करने का विशेष महत्व है। गंगा सागर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। गंगा सागर में स्नान करने के बाद मनुष्य को कंबल इत्यादि उनी वस्त्र, तिल, गुड आदि दान करना चाहिए।

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