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By Gaurav Kashyap On 11 Apr, 2018 At 06:59 AM | Categorized As Literature, Poem, Religion | With 0 Comments
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जब रमन था गैरों में तब पकड़ थी,भय था,चिन्ता थी अब खुद का खुद में रमन हैं अब किस की चिंता , किसका भय? मै ही राधा, मैं कन्हैया मै वृन्दावन वाटिका हूँ मैं ही रास और मै रसैया मैं ही मुरली, मैं बजैया।

By Gaurav Kashyap On 9 Apr, 2018 At 06:44 AM | Categorized As Literature, Poem, Religion | With 0 Comments
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जब चेतन को है जान लिया तो मूर्ति पूजा कौन करे… तू मुझ में है, मैं तुझ में हूँ मुझमें और तुझमें भेद नहीं जब मुझमें और तुझमें भेद नहीं तब आरती पूजा कौन करे? जब चेतन को है जान लिया तो मूर्ति पूजा कौन करे… कण कण में तुझको जान लिया हर घट में [...]

By admin On 23 Sep, 2013 At 12:16 PM | Categorized As Poem, Uttarakhand | With 0 Comments
Gangajal

महराज श्री के उपदेश पावन गंगा की तरह शीतलता प्रदान करते है

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