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सबसे प्राचीन पद्धति है हीलिंग चिकित्सा-स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी
By Gaurav Kashyap On 15 Apr, 2019 At 03:11 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments
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  • गौरव कश्यप
हरिद्वार 15 अप्रैल। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि भारतीय ऋषि मुनियों द्वारा प्रतिपादित हीलिंग चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इस पद्धति का ज्ञान प्राप्त कर व्यक्ति ब्रहामण्डीय शक्तियों से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर बिना दवाओं के भी हमेशा स्वस्थ रह सकता है। बिना दवाओं के भी उपचार हो सकता है। हीलिंग पद्धति इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
जगजीतपुर स्थित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र में आयोजित समारोह के दौरान स्थानीय नागरिकों एवं केंद्र में इलाज करा रहे रोगियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डा.अजय मगन द्वारा स्थापित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र में ब्रहामण्डीय ऊर्जा पर आधारित उपचार की जो विधि विकसित की गयी है। रोगों से पीड़ित मानवता को इसका अवश्य ही लाभ मिलेगा। वैज्ञानिक कसौटी पर पूरी तरह खरी कॉस्मिक क्रांति का प्रचार प्रसार कर रहे डा.अजय मगन बधाई के पात्र हैं। इस पद्धति के लिए प्राचीन हीलिंग तकनीकों एवं नवीनतम वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधानों के संयुक्त मिश्रण पर आधारित हीलिंग विधा है। ऊर्जाओं में समन्वय स्थापित कर रोगियों के रोगों का निदान किया जाता है।
डा.अजय मगन ने बताया कि इस केंद्र में देश एवं विदेशों में पंचतत्वों के संगम से विभिन्न प्रकार की हीलिंग तथा जीवन में सौभाग्य की संभावना को बढ़ाने के लिए ऊर्जाओं के प्रयोग पर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। असाध्य रोगों का उपचार हीलिंग चिकित्सा पद्धति से किया जा रहा है। बिना रक्त जांच व दवाओं के बगैर ही रोगी इस पद्धति से पूरी तरह ठीक हो जाता है। व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जाओं का निदान करने के परामर्श भी प्रदान किए जाते हैं। ऋषि मुनियों की यह पद्धति आज भी उतनी ही कारगर है। जितनी पांच हजार वर्ष पूर्व थी।

संतों के आशीर्वाद से जगजीतपुर स्थित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र पर रोगियों का सफलता पूर्वक इलाज किया जा रहा है। ब्रहामण्डीय ऊर्जाओं के माध्यम से जटिल से जटिल बीमारी भी ठीक की जा सकती है। महंगी चिकित्सा पद्धति से लोगों को निजात भी मिलेगी। जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि कॉस्मोलॉजी व कॉस्मोपैथी स्वास्थ्य रक्षण व धन संचय का उत्तम उपाय है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति द्वारा व्यक्ति बिना दवाओं के सदैव स्वस्थ रह सकता है। प्राचीन काल में हमारे पूर्वज इसी पद्धति के आधार पर प्रकृति से समन्वय कर चिरायु जीवन व्यतीत करते थे। वर्तमान में भी व्यक्ति के भीतर मौजूद उसकी आंतरिक ऊर्जा का ज्ञान कराकर स्वस्थ जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
स्वामी प्रबोधानंद गिरी व बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि प्रकृति से उत्पन्न मानव शरीर प्राकृतिक तत्वों से ही बना है। शरीर के अस्वस्थ होने पर प्रकृति से प्राप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर इसे स्वस्थ बनाया जा सकता है। कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र में उपचार के लिए प्रयोग की जा रही हीलिंग पद्धति रोगों के उपचार में लाभकारी सिद्ध होगी। मानवता को इसका भरपूर लाभ मिलेगा।
इस मौके पर संजय जैन, उषा जैन, नमित जैन, डा.पूजा मगन, अतुल मगन, शालिनी मगन, गीता मगन ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरूषों का माल्यार्पण कर स्वागत किया व आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर म.म.स्वामी कपिल मुनि महाराज, महंत कमलदास, स्वामी शंकरदास, बाबा रामेश्वरानंद, महंत जमनादास, स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी शिवानंद, शिल्पी ग्रोवर, कीर्ति शर्मा, नीतू जैन, अजय जैन, जोहरी लाल जैन, शोभा देवी, शिवानी सैनी, नैना चौधरी, पराग कौशिक, पुरू जैन, गगन साहनी, दामिनी सेठी, सपना, आरती, निधि, अंकुर, संदीप, सन्नी, पूजा, आंचल, राजेश गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

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