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घुमक्कड की डायरी से—जानिए दलित आंदोलन से किसकी खिसकी जमीन
By Gaurav Kashyap On 3 Apr, 2018 At 01:38 PM | Categorized As Political party | With 0 Comments

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जिस तरह से सोमवार को दलितों का गुस्सा सडकों पर उतरा। उसने केंद्र में बैठी नरेन्द्र मोदी सरकार की नींद उडा कर रख दी। संघ का सालों से यह सपना रहा है कि वृहद हिन्दू समाज संगठित होकर चले। परंतु सोमवार को दलित समुदाय के विरोध प्रदर्शनों ने संघ के सपने को चकनाचूर करने का काम किया। 2014 में नरेंद्र मोदी पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने थे। तब मोदी की इस करिश्माई जीत के ​पीछे दलित समुदाय का मोदी के पीछे एक जुट होकर खडा होना था। बसपा का दलित मुस्लिम गठजोड मोदी ने हिन्दू—मुस्लिम कार्ड खेल कर तोडा। उसमें तब मुजफफरनगर दंगे की भी भूमिका थी। दलित आंदोलन के बाद तुरंत ही कथित आरक्षण हटाओ समिति ने दस अप्रैल को भारत बंद का एलान कर दिया। इस तरह हिन्दू समाज को कमंडल के नाम पर एक करने वाले संघ के ब्राह्मस्त्र को तोडने के लिए वीपी सिंह ने जैसे मंडल कार्ड खेला था। वैसा ही कार्ड अब दलित बनाम अगडा खेला जा रहा है। ताकि मोदी सत्ता से बाहर हो जाए। इस जातिवादी खेल की काट में हिन्दूवादी संगठन कहीं पूरे देश में मुजफफरनगर कांड न करवा दे। अब देखना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले देश की राजनीति क्या—क्या रंग दिखाती है। यह भी आशंका है कि दलित—अगडा आंदोलन में कहीं पडोसी देशों का भी हाथ तो नही है।

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