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घुम्मकड की डायरी से— चर्चिल ने क्या कहा था भारतीय नेताओं के बारे में
By Gaurav Kashyap On 4 Apr, 2018 At 01:50 PM | Categorized As ghumakkad dayri, India, Political party | With 0 Comments

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आज देश में कहीं एससी—एसटी के आरक्षण के बाबत तो कहीं जाट, गुर्जर आरक्षण को लेकर और कहीं मंदिर—मस्जिद को लेकर उग्र—हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कहीं विभिन्न राज्यों के बंटवारे या फिर नदियों के जल बंटवारे को लेकर धरना—प्रदर्शन किए जा रहे हैं। किसी को भी राष्ट्र की चिंता नहीं है। पूरा देश जात—पात, मजहब, क्षेत्रवाद के लिए बीच बंट गया है। सत्ता में आने के लिए वोटों की खातिर राजनेता जात—पात, मजहब और क्षेत्रवाद को हवा देते हैं और देश के लोग इन राजनेताओं की कठपुतली बन कर एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं और सत्ता पाने के लिए राजनेता लाशों की राजनीति करते हैं। इन दंगों से देश का विकास अवरूद्ध हो जाता है, इन उग्र प्रदर्शनों के दौरान इंसानियत का खुले आम चीरहरण होता है। जब देश से अंग्रेज हुक्मरानों ने हिन्दू—मुस्लिमों को धर्म के नाम पर लडा दिया, हिन्दुओं को जात—पात के नाम पर लडवाया। जब देश आजाद हो रहा था तब अंग्रेजों ने देश को धर्म के नाम पर बांट दिया था। हिन्दुओं के लिए हिन्दुस्तान यानि भारत और मुसलमानों के लिए पाकिस्तान। इतना ही नहीं अंग्रेज हुक्मरानों ने भारत के कई और भी टुकडे करने की योजना बनाई थी।

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हरिजनों यानि दलितों के लिए हरिजन लैंड, सिखों के लिए खालिस्तान। परंतु तब महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार बल्लभ भाई पटेल की सूझ—बूझ से भारत के और टुकडे नहीं कर पाए। महात्मा गांधी के आग्रह पर ही भीमराव अंबेडकर को संविधान सभा का कर्ता—धर्ता बनाया गया। यदि नेहरू और अधिक सूझबूझ व उदारता दिखाते तो देश के दो टुकडे न होते। नेहरू महात्मा गांधी की बात मान लेते और मौहम्मद अली जिन्ना को भारत का छह महीने के लिए अंतरिम प्रधानमंत्री बना देते और कांग्रेस पार्टी को भंग कर देते और संविधान लागू होने के बाद देश में पहले लोकसभा आम चुनाव होते तो आज अविभाजित भारत दुनियां की सबसे बडी महाशक्ति होता, परंतु अंग्रेज देश का बंटवारा करा कर चले गए और हिन्दुस्तान—पाकिस्तान बना कर हिन्दु—मुस्लिमों के बीच नफरत के बीज बो गए। आजादी के बाद देश में सत्ता के शीर्ष पर बैठे हमारे सत्ताधीश समाजवादी विचारक व चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया की बात मानते और भारत—पाकिस्तान का महासंघ बनाते और आपस में लडाई झगडा करने के बजाय दोनों देशों के आम नागरिकों के कल्याण के लिए सोचते। जब अंग्रेजों ने धर्म के नाम पर देश का बंटवारा किया था। तब उन्होंने भारत के नेताओं को यह समझाया था। तब उन्होंने भारत के नेताओं को यह समझाया था कि देश एक रहा तो हिन्दु—मुस्लिम झगडे होते रहेंगे। यदि अंग्रेजों की यह बात सही थी तो फिर आज भारत में हिन्दु—मुस्लिम, दलित अगडों ​पिछडों को लेकर आपस में हम हिन्दुस्तानी क्यों झगड रहे हैं। वहीं पाकिस्तान में ब्लूचिस्तानी, सिंधी और पंजाबी तथा भारत से गए मुसलमान आपस में क्यों एक दूसरे के खून के प्यासे हो रहे है। अंग्रेजों ने हम लोगों में इसलिए नफरत के बीज बोए ताकि हम आपस में लडते रहे और सारी उर्जा इसी काम में लगा दे। आज भारत पाकिस्तान पश्चिमी देशों से हथियार खरीदने के लिए जो रूपया—पैसा लगा रहे है, उतनी धनराशि यदि हम देश के विकास में लगाते तो भारत—पाकिस्तान विश्व की एक बडी ताकत होते। अंग्रेज हुक्मरान चर्चिल ने कहा था कि भारतीय लोग देश की सत्ता चलाना नहीं जानते हैं। इन्हें यदि इंडिया की कमान सौंप दी तो ये देश का बेडा गर्क कर देंगे। लगता है कि जिस तरह से भारत—पाकिस्तान में सत्ताधीशों का आचरण रहा है उससे साफ जाहिर है कि हमारे राजनेताओं ने चर्चिल की बात को सही साबित कर दिया है और हमारे राजनेता वास्तव में देश चलाना नहीं जानते हैं। उनका एकमेव लक्ष्य केवल सत्ता हासिल करना है, उसके लिए वे देश के लोगों को समय—समय पर मंदिर—मस्जिद, जात—पात और क्षेत्रवाद के नाम पर लडाते रहते है। काश हमारे राजनेता चर्चिल की बात को गलत साबित करने की कूबत रखते।

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