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निर्मल पंचायती अखाडे में धूमधाम से मनाया गया गुरू पूर्णिमा पर्व
By Gaurav Kashyap On 27 Jul, 2018 At 03:20 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments
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गौरव कश्यप
श्री गुरू ग्रंथ साहिब और दसों गुरूओं की पूजा अर्चना की गई
हरिद्वार 27 जुलाई। गुरू पूर्णिमा पर्व के अवसर पर श्री निर्मल पंचायती अखाडा कनखल में श्री गु्रू ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ के समापन का भोग चढाया गया और दसों गुरूओं की पूजा—अर्चना की गई। इस अवसर पर अखाडा के श्रीमहन्त ज्ञानदेव सिंह महाराज ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब और दसों गुरूओं की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरूनानक देव जी से लेकर श्री गुरू गोविन्द सिंह जी तक सभी गुरूओं ने समाज को अंधविश्वास के अंधकार से बाहर निकालकर ज्ञान का उजाला प्रदान किया।
गुरूओं की वाणी हमेशा प्रासंगिक रहेगी—श्री महन्त ज्ञानदेव सिंह महाराज
उन्होंने कहा कि गुरूओं की वाणी हमेशा प्रासंगिक रहेगी और गुरू का नाम ही प्रकाश है, जो संसार को अज्ञानरूपी अंधकार से बाहर निकालकर ज्ञान का प्रकाश करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरू पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता हैं क्योंकि व्यास जी ने गुरू पूर्णिमा के दिन शिष्यों को ज्ञान प्रदान किया था और वेदों की रचना की थी। गुरूओं की अमृतमयी वाणी हमें मोक्ष प्रदान करती है। गुरू ग्रंथ साहिब में हमे गुरू वाणी के रूप में ज्ञान का प्रकाश मिलता है। बिना गुरू के जीवन में न तो ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है और न ही मोक्ष मिल सकता है।
इस अवसर पर श्री निर्मल पंचायती अखाडा के कोठारी महन्त जसविन्दर सिंह शास्त्री ने कहा कि गुरू महाराज की अपार कृपा से हमारे संकट दूर हो जाते हैं। गुरू का पद भगवान से भी ऊंचा है, क्योंकि गुरू ही भगवान को प्राप्त करने का रास्ता बताते हैं। उन्होंने कहा कि गुरू का ध्यान सबसे बडा ध्यान है और वह सब ध्यानों, स्वरूपों, चिंतनों, पूजाओं, मंत्रों का मूल है, क्योंकि जब तक गुरू की कृपा नहीं होती, तब तक हमें संसार के जन्म—मरण के चक्र से मुक्ति नहीं प्रदान हो सकती। गुरू—शिष्य परंपरा हमारे देश में सदियों से चली आ रही है, जो बहुत पवित्र है।
महन्त कमलजीत सिंह ने कहा कि गुरू की महिमा हमारे शास्त्रों में ईश्वर की महिमा से भी बडी बताई गई है। कार्यक्रम का संचालन महन्त दर्शन सिंह शास्त्री ने किया। इस अवसर पर महन्त सतनाम सिंह, महन्त अनूप सिंह, महन्त जगतार सिंह, महन्त बाबू सिंह, महन्त साहिब सिंह, महन्त हरदेव सिंह राजस्थान वाले, महन्त हरदीप सिंह, महन्त खेम सिंह, महन्त अंग्रेज सिंह, महन्त ज्ञान सिंह आदि उपस्थित थे।

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