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दो दिवसीय ज्ञानकुंभ का राष्ट्रपति ने किया विधिवत शुभारंभ, जानिए क्या रहा खास ज्ञानकुंभ के पहले दिन…
By Gaurav Kashyap On 3 Nov, 2018 At 01:35 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments

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  • गौरव कश्यप

देश की शिक्षा पद्दति में लागू किए जाएंगे ज्ञान कुम्भ में दिए गए उचित सुझाव…
हरिद्वार 3 नवंबर। देश की शिक्षा पद्दति में गुणवत्ता और संस्कार लाने के लिए धर्मनगरी हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयोजित दो दिवसीय विश्व स्तरीय ज्ञान कुम्भ का उद्घाटन आज हरिद्वार पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया। माननीय राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर ज्ञान कुम्भ का विधिवत सुभारम्भ किया। इस मौके पर माननीय राज्यपाल उत्तराखंड बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी योग गुरु बाबा रामदेव आचार्य बालकृष्ण सहित बीजेपी विधायक वरिष्ठ नेता प्रबुद्धजन और विद्यार्थी शामिल हुए। राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान कुम्भ से जो अमृत मिलेगा उससे उत्तराखंड में ही नही अपितु देश मे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की मदद मिलेगी।

आपको बता दे कि पतंजलि में आयोजित देश के पहले विश्व स्तरीय ज्ञान कुम्भ में 7 सत्र होंगे। कार्यक्रम मे अलग से सांस्कृतिक कार्यक्रम और गंगा आरती भी शामिल है। ज्ञानकुम्भ के समापन समारोह में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिरकत करेंगे। वही देश भर से दो सौ पच्चीस कुलपति, पांच सौ प्राचार्य, तीन सौ शोधकर्ता र्विद्यार्थी आईटी एनआइटी के प्रोफेसर यूजीसी के चेयरमैन भी कार्यक्रम में शिरकत कर रहे है। इस ज्ञानकुम्भ मे भारतीय ज्ञान परंपरा का अलग से सत्र आयोजित किया गया है। ज्ञान कुम्भ में दिए गए उचित सुझाव देश की शिक्षा पद्दति में लागू किए जाएंगे।

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देश के पहले ज्ञान कुम्भ का उद्घटान करने पहुचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कहना है कि उन्हें यहां आकर अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। ज्ञान कुम्भ अपने आप मे एक सार्थक पहल शिक्षा से आत्मिक जुड़ाव रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बहेतर बनाना है। हमे कमजोर तबके को भी शिक्षा प्रदान करनी होगी। प्रेम त्याग और नैतिक शिक्षा के जरिये राष्ट्र निर्माण करना होगा। हमे आचार्य चाणक्य की तरह अध्यापक बनना होगा और जैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को गरीबी से उठा कर राज गद्दी तक पहुचाया, वैसे ही हमे कमजोर तबके को आगे बढ़ना होगा। शिक्षा से जोड़ना होगा। ज्ञान कुम्भ से जो अमृत मिलेगा, उससे उत्तराखंड में ही नही अपितु देश मे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की मदद मिलेगी। बाबा रामदेव पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि योग की अवधारणा बदल रही है। अब योग जन—जन के लिए सुलभ हो गया। इससे लोग निरोग हो रहे है। बाबा रामदेव ने बड़ा काम किया है। भारत ने योग को दुनिया के कोने—कोने तक पहुचाया

इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा इस ज्ञान कुम्भ की परिकल्पना डॉ धन सिंह रावत और समस्त शिक्षाविद के सहयोग से ही परिकल्पित हुई है। यह ऐतिहासिक दिन है पहला ज्ञान कुम्भ मील का पत्थर साबित होगा। यहां जो मंथन होगा, वह शिक्षा के क्षेत्र में अहम होगा। ज्ञान के माध्यम से हर क्षेत्र में प्रकाश फैलता है। इस कुम्भ के माध्यम से वर्तमान की शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति होगी। हमारे देश के मुकाबले छोटे देश काफी आगे है। हमारे यहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का बेहतर विकास करना होगा। महज तीन फीसदी कालेजो में पीएचडी होती है। कई विश्वविधायलयो के होने के बाद भी हम अपने छात्रों को बेहतर शिक्षा नही दे पाते। राज्य में 71 परसेंट जंगल है यहां चीड़ ज्यादा है। और हमे इससे काफी नुकसान होता है। मगर शोध के बाद यही चीड़ के पेड़ अब हमें तेल तारपीन दे रहे है। यह है शोध का फायदा। हमें अपने राज्य के दूरस्थ विश्वद्यालयो को वर्तमान की शिक्षा से जोड़ना होगा।

योग गुरु स्वामी रामदेव ने महामहिम राष्ट्रपति का स्वागत किया। बाबा रामदेव ने कहा कि जब भारत महाशक्ति था, तो वह इसी ज्ञान के कारण था आज हम उसी भारत का निर्माण करना है। इस ज्ञान कुम्भ के माध्यम से आज हर क्षेत्र से ज्ञान का समावेश कर नए भारत का निर्माण करना है। ज्ञान से हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी और इस ज्ञान कुम्भ के माध्यम से पूरा देश गौरान्वित होगा। जिस तरह हमने योग क्रांति की उसी तरह है। सारे विश्व में ज्ञान की क्रांति फैलाएंगे।

हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा का कहना है कि माननीय राष्ट्रपति ने आज ज्ञानकुम्भ का उद्घाटन किया है। भारत को दुबारा विश्व गुरु बनाने के लिए एक प्रयास है। यह हमारी प्राचीन शिक्षा पद्दति का प्रतीक है। हमारी प्राचीन शिक्षा में गुणवत्ता होती थी। ज्ञानकुम्भ अपने आप मे एक अद्बुध आयोजन है। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए हम सब यह पर एकत्रित हुए है।

ज्ञान कुम्भ के दो दिवसीय आयोजन से भारत की शिक्षा पद्दति में गुणवत्ता सुधार और संस्कार लाने की कोशिश की जा रही है। इस ज्ञानकुम्भ में जो उचित सुझाव दिए जाएंगे, वह शिक्षा पद्दति में शामिल किए जाएंगे। वहीं लार्ड मेकाले की शिक्षा पद्दति में सुधार कर भारत को दुबारा विश्व शक्ति बनाने का प्रयास किया जाएगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।

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