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हिन्दी पूरे विश्व में गंगा की तरह प्रवाहित हो रही है—महामंडलेश्वर प्रखर महाराज
By Gaurav Kashyap On 22 Sep, 2018 At 01:57 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments

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  • गौरव कश्यप

हरिद्वार में दो दिवसीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन में जुटे हिन्दुस्तान के जानेमाने साहित्यकार

हरिद्वार 22 सितंबर। भूपतवाला स्थित विश्वनाथ धाम आश्रम में दो दिवसीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन का शुभारंभ महामंडलेश्वर प्रखर महाराज तथा मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ रीता सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर बाबुराम आचार्य डॉ यश ने दीप प्रज्जवलित कर किया तथा सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया।
उद्घाटन सत्र में बोलते हुए महामंडलेश्वर प्रखर महाराज ने कहा कि जैसे गंगा नदी निर्मलता और अविरलता के साथ प्रवाहित होती है, वैसे ही आज भारत में ही नहीं पूरे विश्व में हिन्दी भाषा प्रवाहित हो रही है और पूरी दुनिया का रूझान हिन्दी सीखने की ओर बढ रहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को जो सम्मान विश्व के अन्य देशों में मिल रहा है, वैसा सम्मान भारत में नहीं मिल रहा है, यह एक सोचनीय और विचारणीय प्रश्न है।

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मुख्यअतिथि के रूप में बोलते हुए हिमाचल प्रदेश की रहने वाली डॉ रीता सिंह ने कहा कि मॉरीशस में संपन्न हुुए विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी के प्रचार—प्रसार को लेकर अनेक महत्वपूर्ण फैसले हुए। डॉ सिंह ने कहा कि हिन्दी को हम सबको अपनाना चाहिए। हिन्दी को अपने व्यवहार और आचरण में लाएं।
इस मौके पर डॉ महेश दिवाकर ने कहा कि भारत सरकार के सभी विश्वविद्यालयों में हिन्दी अध्ययन और अध्यापन होना चाहिए और प्रशासकीय सेवाओं की परीक्षाएं भी हिन्दी माध्यम से ही होनी चाहिए। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी (हरियाणा) के प्रोफेसर बाबूराम आचार्य ने कहा कि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि हमारा गौरव भी है।
डॉ भूपेन्द्र सिंह शून्य ने कहा कि हिन्दी के उन्नयन और संवर्धन को लेकर गंभीर चिन्तन होना चाहिए। हिन्दी बाजारवाद के चलते पिछड रही है।
जानेमाने साहित्यकार डॉ ज्वाला प्रसाद, कौशल सिखौला, डॉ रजनी, रमेश रमन, डॉ राकेश चक्र, मनोज मानव, स्वाती रस्तोगी, अनमोल शुक्ल, महावीर सिंह, डॉ सरिता चड्ढा, डॉ आदर्शिनी श्रीवास्तव आदि ने अपने विचार रखे। जानेमाने साहित्यकार डॉ हेमराज वोहरा की पुस्तकों पर विशेष चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन बृजेन्द्र हर्ष और डॉ महेश दिवाकर ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम के संयोजक बृजेन्द्र हर्ष ने बताया कि दो दिवसीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन का समापन कल रविवार की शाम को होगा। सम्मेलन में देश के सभी राज्यों से आए करीब 70 साहित्यकार प्रतिभाग कर रहे हैं।

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