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By Gaurav Kashyap On 19 Mar, 2018 At 06:38 AM | Categorized As Economic, Travels | With 0 Comments
Indian Currency not accepted by London Airport because of low value

Indian Currency not accepted by London Airport because of low value

 

नो इंडियन करंसी प्लीज
“मैक्गिल यूनीवर्सिटी” -अरे यह तो कनेडा की सबसे पुरानी और टाॅप यूनिवर्सिटी है-“ एट पार विद हारवर्ड आफ अमेरिका“ (अमेरिका की हारवर्ड की तरह) । यह बात जब मुझे मेरे अमेरिका में रह रहे अंकल ने बताई तो लालच आ गया। इस यूनिवर्सिटी ने मेरा शोध पेपर सफरिंग और पर्सनहुड पर स्वीकार किया था। आने जाने का किराया नहीं दे रहे थे इसलिए मैंने जाने का ख्याल छोड़ दिया था परंतु स्पांसरशिप की व्यवस्था भी प्रभु ने करवा दी ।

क्योंकि कांन्फ्रैंस दुख के महत्त्व पर थी, शायद इसीलिए इस यात्रा के दौरान मैंने भरपूर दुख और अंत में अत्याधिक ब्लिस का अनुभव किया।
टिकट केवल दो दिन पूर्व ही प्राप्त हुआ था इसलिए मैं करंसी नहीं ले पाई, न ही ट्रैवल कार्ड। बस 150 डालर पिछली या़त्रा के बचे थे जिसे लेकर मैं रवाना हुई। इन 150 डालर में मुझे एयरपोर्ट से यूनिवर्सिटी तथा मौंरोयाल से मारखम भी पहुँचना था और 24 घंटे की उड़ान में 4-5 घंटे की हीथरो एयरपोर्ट पर ट्रांजिट टाईम भी पार करना था, जिसमें खाना पीना सब कुछ हो सके। यह सोचकर कि भारतीय करंसी को मैं कनेडियन डालर में कनवर्ट करा लूँगी मैंनें हीथरो एयरपोर्ट पर करंसी एक्सचेंज आॅफिस पर अपनी डिमांड रखी। एक ही जवाब सब जगह से मिला-“ नो इंडियन करंसी प्लीज, सौरी हम भारतीय रूपया नहीं लेते।“ बहुत दुख और शर्मिंदगी महसूस हुई।

क्या मेरे देश की करंसी इतनी डाऊन चली गई है कि कोई इसके बदले में अपनी करंसी नहीं दे रहा।

co currency

Currency Change office at Heathrow denied taking Indian Currency

एयरपोर्ट पर ज़्यादातर खुले रेस्तरां होने से नाॅन वेज खाने की महक से परेशान मैं प्रेयर रूम में चली गई। वहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग बारी-बारी से आते अपनी ड्यूटी का कोट उतार पाँव धोकर, वहाँ अल्मारी में रखे शनील के मैट बिछाकर नमाज़ अदा करते। एक दो मोहतरमाएं र्भी आइं जो अपनी नमाज़ अदा कर पांच मिनट में चली गईं। मैंने कैबिनेट में रखी सभी धर्मों की पुस्तकों को देखा। हिंदु धर्म के खाने में केवल इस्कान द्वारा प्रकाशित पुस्तकें ही थीं।

prayer room

Cupboard of Prayer Room at Heathrow Airport

भूखे पेट न भजे गोपाला-मेरा पढ़ने में मन नहीं लगा। पानी का फाऊंटेन तो फ्री ढूंढ लिया था मैंने, किंतु खाने की हर चीज़ बहुत महंगी थी और मुझे तो पहुँचने के लिए पैसे बचाने थे। दिन रात का अंतर होने से और कुछ तबीयत नासाज़ होने से मैं फ्लाइट में बैठते ही सो गई। भारतीय रात्रि का समय था इसलिए मेरी बाॅडी क्लाक अभी बदली नहीं थी इसलिए जो भी स्नैक्स आदि एयर होस्टैस ने सर्व किए वो मैं मिस कर गई। जुकाम औैर गला खराब के कारण घर में तो अदरक शहद पीती आई थी यहाँ केवल ठंडा जूस ही था। मौंरियाल पहुँच कर भी खाना नसीब नहीं हुआ क्योंकि मैस बंद हो गया था। अगले 48 घंटे बाद ही भोजन के दर्शन हुए कांफ्रैस के पहले दिन थामसन हाऊस बोर्डरूम में पहुँचना था। रूम से कान्फै्रंस वैन्यू तक थोड़ी चढ़ाई वाली रोड थी। पानी भी बरस रहा था। छाता तो था नहीं, मंत्र जपते हुए कोट पहने वहाँ पहुँची।

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