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श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से किया गया महामंडलेश्वर के रूप में पट्टाभिषेक, दो महामंडलेश्वरों का हुआ पट्टाभिषेक
By Gaurav Kashyap On 18 Apr, 2019 At 09:46 AM | Categorized As Uncategorized | With 0 Comments

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  • गौरव कश्यप

हरिद्वार 17 अप्रैल। श्री कृष्णा पूर्णानंद आश्रम संन्यास रोड़ कनखल में आज श्री महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज और अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद महाराज और श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी महाराज के पावन सानिध्य में आज एक भव्य समारोह में स्वामी दिव्यानंद पुरी (पठानकोट वाले) तथा स्वामी अक्षानंद गिरी (जम्मू) को श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर के रूप में पट्टाभिषेक किया। इस अवसर पर बड़ी तादाद में विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों के महामंडलेश्वर और श्रीमहन्त उपस्थित थे।
मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए निर्माणापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज ने कहा कि आदि जगद्गुरू शंकराचार्य ने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र के सिद्धान्त को प्रतिपादित किया। जिसके तहत शासन प्रशासन चलाने के लिए अखाड़ों की स्थापना की गई और युद्ध में पराजित करने के लिए दशनामी नागा संन्यासियों की फौज बनाई गई। वहीं विद्वतजनों के लिए महामंडलेश्वर के पद को सृजित किया गया। ताकि सनातन धर्म के विरोधियों को शस्त्र और शास्त्र दोनों से पराजित किया जा सके।
अटल पीठाधीश्वर स्वामी विश्वात्मानंद महाराज ने कहा कि जब—जब धर्म की हानि होती है, तब—तब अधर्म का विनाश करने के लिए भगवान मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं। राम और कृष्ण का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ।
श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा कि आदि जगद्गुरू शंकराचार्य ने दशनामी अखाड़ा परंपरा के तहत अखाड़ों को सर्वोपरि माना और अखाड़े की महान परंपराओं की स्थापना की। जिसका पालन करना सभी संतों, महन्तों और महामंडलेश्वरों का पूनीत कर्तव्य है। अखाड़ों की परंपराओं से ऊपर उठकर कोई नहीं है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरी महाराज ने कहा कि दशनामी संन्यास परंपरा सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदि जगद्गुरू शंकराचार्य ने की।
इस अवसर पर नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी अक्षानंद महाराज ने कहा कि वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए हमेशा कार्य करते रहेंगे।
वहीं नवागत महामंडलेश्वर स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज ने कहा कि हम वैदिक धर्म को और आगे बढ़ाएंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का मुकुट है। उसकी रक्षा के लिए संत समाज एकजुट होकर कार्य करेगा।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर प्रेम गिरी, महन्त रघुवीर दास, महामंडलेश्वर शिवेन्द्र पुरी, महन्त अर्जुन पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद महाराज, महामंलेश्वर स्वामी कमलपुरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरी महराज, महामंडलेश्वर प्रेमानंद, महामंडलेश्वर आत्मानंद समेत कई संत—महन्तों ने अपने विचार रखे।

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