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अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद् ने संगठन के हितों पर किया गहन मंथन
By Gaurav Kashyap On 15 Apr, 2019 At 03:21 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments
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  • गौरव कश्यप
हरिद्वार 15 अप्रैल। विप्र बन्धुओं के राष्ट्रीय पंजीकृत संगठन अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद् उत्तराखण्ड द्वारा 14 अप्रैल को प्रेस क्लब सभागार हरिद्वार में विप्र हितों पर गहन विचार-विमर्श हेतु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष मेजर पं. सरस त्रिपाठी,  ने कहा कि परिषद गैर राजनैतिक संगठन है किसी जाति, धर्म, संगठन के खिलाफ नहीं हम अपने समाज हित के लिए संगठित हो रहे हैं।  संगोष्ठी में कनिष्क कटारिया जिन्होंने वर्ष 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में प्रथम रैंक प्राप्त की, का जिक्र करते हुए कहा कि जिसके माता-पिता आईएएस हो उसे आरक्षण की क्या जरूरत। वह एससी कोटे के विद्यार्थी रहे है, जबकि उनके पिता और उनके ताउ एक आईएएस आफिसर रहे हैं। त्रिपाठी जी ने ब्राह्मण विरोधी कार्य कर रहे संगठनों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई समाज ब्राह्मणों पर उंगली उठाते हुए कहते हैं कि ब्राह्मण दूसरी जातियों को शिक्षा से वंचित रखते थे और स्वयं धनवान हुआ करते थे, तो उन्हौंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके गुरू संदीपनी ऋषि थे जो कि ब्राह्मण थे और सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे इसलिए दोनों तें गलत सिद्ध होती हैं। त्रिपाठी जी ने बताया कि 1952 में जब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मुंबई से अपना चुनाव हार गए तो पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें फिर भी अपनी कैबिनेट में शामिल किया और उन्हें भारत के पहले कानून मंत्री बनने का गौरव प्रदान किया। एक तो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कांग्रेस के नहीं थे और ना तो पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनके सपोर्ट या समर्थन की आवश्यकता थी, उन्होंने कहा कि यदि ब्राह्मण जातिवादी होते तो तुलसीदास (जिनका असली नाम रामबोला द्विवेदी था) रामचरितमानस न लिखकर रावणचरितमानस लिखते क्यांेकि रावण एक ब्राह्मण था और एक ऐसा ब्राह्मण था जिसके समान धरती पर उस समय ना तो कोई विद्वान, ना कोई धनवान, ना कोई ज्ञानी, ना कोई शक्तिशाली और ना ही कोई उसके सामान राजा था, फिर भी गोस्वामी तुलसीदास ने राम की प्रशंसा में रामचरितमानस लिखा ना कि रावणचरित मानस।
विशिष्ट अतिथि डाॅ. अभिलाषा द्विवेदी ने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज जो नये-नये शोध हो रहे हैं, वे हमारे ग्रन्थो में पहले से ही उल्लेखित है, जैसे एक कोशिका विज्ञान के क्षेत्र में एक नये शोध के अनुसार प्रातःकाल हमारी कोशिकाएं पुनर्जन्म लेती हैं और नवीन होती हैं इसलिए उस समय किए गए कार्य परिपूर्ण होते हैं, इसीलए प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठने पर जोर दिया गया है। हमारे वेदों में तो प्रमुखता से कहा गया है कि ब्रह्म मूहूर्त में उठना चाहिए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड विश्वविद्याल के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वैदिक मूल्यों कि अवहेलना करने से कोई जाति या धर्म आगे नहीं बढ़ पाया है, इसका उदाहरण बौद्ध धर्म है जो कि भारत में अपनी जड़ें जमाने में असफल रहा। आज ब्राह्मणों के विषय में मिथ्या प्रचार किया जा रहा है कि अन्य जातियोंक का शोषण किया है जबकि ब्राह्मण ने सभी संसाधनों का मालिक अन्य जातियों को ही बनाया है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण को दान इसलिए दिया जाता है, क्योंकि ब्राह्मण को ज्ञान होता है कि दान के धन का उपयोग कहां करना है यह बुद्धि ब्राह्मण में ही होती है। अगर ब्राह्मण पर संकट आता है तो पूरे हिन्दू धर्म पर संकट आयेगा।
पं. श्याम शुक्ला ने परिषद् की वेबसाइट से जुड़ने के लिए सभी विप्र बन्धुओं से आह्वान करते हुए कहा कि वेबसाइट में निःशुल्क वैवाहिक विज्ञापन प्रदर्शित किये जा रहे हैं जहां पर इच्छुक विप्र अपने पुत्र पुत्री का विवरण प्रेषित कर उपलब्ध विवरण में से योग्य वर/वधु की तलाश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि परिषद् यूट्यूब चैनल के माध्यम से हाई स्कूल, इण्टरमीडिएट में पढ़ने वाले ब्राह्मण छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लाशें भी चलाएगी, जिसका लाभ घर बैठे ही छात्र उठा सकेंगे साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जायेगी। समाज का प्रत्येक विप्र एक दूसरे से परिचित हो इसको ध्यान में रखते हुए सभी सदस्यों का डाटा वेबसाइट में प्रदर्शित होगा और आपस में सम्पर्क के इच्छुक व्यक्ति देश विदेश में विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारी, चिकित्सक, पत्रकार, अधिवक्ता, व्यापारी/व्यवसायी आपस में एक दूसरे का सहयोग एवं मार्गदर्शन कर सकेंगे।
इस मौके पर पं. गोपालकृष्ण बडोला, पं. शक्तिधर शास्त्री, पं. प्रदीप शर्मा, पं. ललिता मिश्रा, पं. रवि मिश्रा, पं. रवि दुवे, डाॅ. सचिन पाठक, पं. निशांत कौशिक, पं. दिनेश जोशी, पं. विजय शर्मा, पं. मनेाज शुक्ला, डाॅ. उदय नारायण पाण्डेय, पं. कमलेश्वर मिश्रा, पं. सुजीत शुक्ल, पं. हरि नारायण त्रिपाठी, पं. ललित मिश्रा, पं. दीपक नौटियाल, पं. बृजेश पाण्डेय, पं.ललितेन्द्र नाथ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आये सैकड़ों विप्र बन्धु उपिस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अरविन्द नारायण मिश्र एवं प्रदेश संयोजक पं. बालकृष्ण शास्त्री ने संयुक्त रूप से किया। संयोजक मण्डल द्वारा अतिथियों को गंगाजली एवं रूद्राक्ष की माला भेट की गयी।
      इससे पूर्व प्रातः 10 बजे हवन पूजन के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा परिषद् के कार्यालय का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर पं. मनोज गौतम, पं. राहुल कौशिक, पं. वैभव मिश्रा, पं. चन्द्रकान्त दुबे, पं. रामेश्वर गौड, पं. लोकेश भारद्वाज, पं. अंजनी चैबे सहित विप्र मौजूद रहे।

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