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सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों पर जलाभिषेक, भक्तों की भारी भीड
By Gaurav Kashyap On 30 Jul, 2018 At 05:37 AM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments

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  • गौरव कश्यप

अपनी ससुराल कनखल पहुंचे भोले बाबा
हरिद्वार 30 जुलाई। आज सावन का पहला सोमवार है यानि शिव की भक्ति के लिए सबसे अच्छा दिन। मान्यता है कि शिव को सोमवार का दिन सबसे ज्यादा प्रिय होता है इसलिए इस दिन शिव की भक्ति और उनका जलाभिषेक करने पर शिव कि कृपा अपार मिलती है यह भी माना जाता है कि शिव सावन के पूरे महीने अपनी ससुराल कनखल में दक्षेश्वर महादेव मंदिर में ही निवास करते है और यही से सृष्टि का संचालन और लोगो का कल्याण करते हैं हरिद्वार के शिव मंदिरों में भोले शिव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ रहा। शिव की ससुराल कनखल के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें लगी हुई हैं। इस बार सावन का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इस बार सावन के महीने में पांच सोमवार पड रहे हैं और पंचाक्षर भगवान शिव का मूलमंत्र है।

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हरिद्वार में सावन के महीने में शिव और शक्ति दोनों की एक साथ पूजा होती है। इसलिए आदि दक्षिण काली पीठ में एक महीने तक भगवान भोलेनाथ और महाकाली की एक साथ पूजा की जाती है। और गंगा जल से भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है। सावन के महीने में हरिद्वार में कांवडियों की धूम रहती है।

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कनखल में श्मशान घाट स्थित दरिद्र भंजन महादेव मंदिर में शिव जी चालीस दिन की आराधना की जाती है। मान्यता है कि चालीस दिन लगातार यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। सावन के महीने मे शिव की अराधना का खास महत्व माना जाता है क्योंकि सोमवार का दिन भोले शिव को बहुत पंसद होता है कहा जाता है कि शिव को सावन में वह भी सोमवार के दिन जलाभिषेक करने से शिव भक्तों से जल्द ही प्रसन्न हो जाते है माना जाता है कि समुद्र मंथन के बाद जब चन्द्रमा राहू से बचकर भाग रहे थे तो उन्हें शिव ने ही अभयदान दिया था तभी शिव ने चन्द्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया था तब शिव ने अपना प्रिय सोमवार शिव को अर्पित कर दिया था और कहा था कि जो भी सोमवार के दिन शिव का जलाभिषेक करेंगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी इसके अलावा कहा जाता है कि सावन के महीने में ही गंगा देवलोक से पृथ्वी पर आने के लिए सावन के महीने में ही शिव की जटाओं में आई थी इस लिए सावन में ही शिवके जलाभिषेक का काफी महत्व बताया जाता है।

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