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विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सिंचाई विभाग का यह अधिकारी करोड़ों के कर चुका वारे—न्यारे, जानिए पूरी खबर
By Gaurav Kashyap On 4 May, 2018 At 02:02 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments

  • गौरव कश्यप

हरिद्वार 4 मई। हरिद्वार उत्तराखंड के सिंचाई विभाग की हरिद्वार इकाई में तैनात सिविल के सहायक अभियंता निर्देश कुमार अपनी कार्यप्रणाली के चलते विवादों के घेरे में आ गए हैं। सिंचाई विभाग उत्तराखंड के मुख्य अभियंता दिनेश चंद्र ने उनसे एक चार्ज हटाकर चीफ आॅफिस के साथ अटैच कर दिया है। जिससे उन्हें करारा झटका लगा है। अब तक उनके पास सिंचाई विभाग में डबल चार्ज था। जिसका फायदा उठाकर उन्होंने सिंचाई विभाग का जमकर दोहन किया।

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को यह अधिकारी खुलेआम धत्ता बता रहा है। राज्य सरकार की तबादला नीति का खुला मखौल उड़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री से लेकर सिंचाई मंत्री तक इस अधिकारी के रोकथाम के आगे पंगु नजर आ रहे हैं। इन के काले कारनामों के किस्से आजकल चर्चाओं में हैं। वहीं अपनी रहस्यमई बीमारी के बावजूद भी पूर्व में मलाईदार विभागों पर काबिज रहे विभागीय अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर की गई टिप्पणियों से यह साफ हो जाता है कि निर्देश कितना शक्तिशाली है।

विदित हो कि निर्देश कुमार नियम विरुद्ध स्थानांतरण के बावजूद दो दो जगह काबीज रहे और पूर्व में संपन्न हुए अर्द्धकुंभ मेले के दौरान भी सारे विभागीय काम इनकी देखरेख में संपन्न करवाए गए। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता दिनेश चंद्र का इन्हें वरदहस्त प्राप्त है और हर बार स्थानांतरण रोकने की सिफारिश भी इन्होंने ही की है।

वहीं दूसरी ओर एक विभागीय ठेकेदार ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि श्री निर्देश अब तक विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते करोड़ों के वारे न्यारे कर चुका है तथा इसके काले कारनामों की अगर सही ढंग से जीरो टॉलरेंस की सरकार जांच करवाती है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

वहीं ठेकेदार ने बताया कि अर्ध कुंभ मेले के दौरान कुछ कार्यों के भुगतान को लेकर भी निर्देश द्वारा जमकर कमीशन खाया गया इसके सबूत भी हमारे पास है और इसमें इनके विभागीय जेई दीपक सैनी जो कि वर्तमान में श्रीनगर में पीएमजेएसवाई में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं का हस्तलिखित कमीशनखोरी का पर्चा भी उपलब्ध है, जिसकी किसी भी राइटिंग एक्सपर्ट से जांच करवाई जा सकती है। विभागीय ठेकेदार ने आगे कहा कि अगर सरकार निर्देश के काले कारनामों की उच्च स्तरीय जांच नहीं करवाती है तो वह और अन्य पीड़ित ठेकेदार शीघ्र ही आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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