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गुरू पूर्णिमा के अवसर पर क्या संकल्प लिए स्वामी रामदेव ने, जानें इस खबर में
By Gaurav Kashyap On 27 Jul, 2018 At 03:20 PM | Categorized As Haridwar, Uttarakhand | With 0 Comments

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गौरव कश्यप
स्वामी रामदेव बच्चों को गर्भ में ही देंगे संस्कार
योगगुरू स्वामी रामदेव ने नव दंपत्तियों की संतानों को उनके गर्भ में ही ऋषिमुनियों द्वारा स्थापित संस्कार देने का ऐलान किया है। गुरू पूर्णिमा के मौके पर उन्होंने कहा कि जल्दी ही​ पतंजलि योगपीठ में नवदंपत्तियों के लिए संस्कार शिविर लगाया जाएगा। जिससे गर्भ से ही उनकी संतानों को ऐसे संस्कार मिले जिससे वे बच्चे रोगों, बिमारियों और बुराईयों से बचें। स्वामी रामदेव का कहना है कि जैसे वीर अभिमन्यु ने मां के गर्भ में ही चक्रव्यहू का वेदन करना सीखा था, वैसे ही भावी पीढी को संसार में चल रहे कुचक्रों से बचाने के लिए गर्भ से ही अच्छे संस्कार सीखें, जिसकी आज बेहद आवश्यकता है और भावी पीढी के जीवन को सोलह संस्कारों से कैसे पावन बनाने के साथ—साथ इस संस्कार शिविर में नवदंपत्तियों को योग, यज्ञ, स्वाध्याय और सात्विक जीवन पद्धति से कैसे उनके और उनकी संतानों के जीवन को पावन बनाया जा सकता है, यह सिखाया जाएगा।

अब पतंजलि में दिखेंगे नन्हें—मुन्हें बच्चे
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि अब पतंजलि योगपीठ में आठ—दस साल के बच्चों को प्रवेश देने की बजाय दो—तीन साल की उम्र के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। ताकि जब बच्चा बोलना शुरू करे, तो उसके मु्ंह से संस्कृत भाषा के शब्द निकलें। और दस साल तक की उम्र में ही उन बच्चों को तीन से पांच भाषाओं का ज्ञान होगा और इन बच्चों में ऋषि परंपरा के संस्कार डाले जाएंगे।

​विश्वगुरू देश है भारत—स्वामी रामदेव
गुरू पूर्णिमा की महिमा बताते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत विश्वगुरू देश है। गुरूओं और ऋषियों की परंपरा से ही भारत भारत बना है। उन्ही गुरूओं और ऋषियों की हम संतान हैं। उन गुरूओं के ज्ञान, जीवन और चरित्र का आचरण करते हुए हम भी गुरूओं और ऋषियों जैसे बनकर अपने जीवन का विकास करें। उन्होंने कहा कि गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरू मंत्र व नाम का दान देते हैं। ऊँ ये बडा कोई नाम नहीं है और गायत्री मंत्र से बडा कोई मंत्र नहीं है। गुरू दीक्षा पाकर शिष्य गुरू से जो ज्ञान पाते हैं, उसे वे अपने जीवन में उतारे। यही उनकी गुरू दक्षिणा है। शिष्य जीवन में स्वयं को गुरू जैसा बनाने का संकल्प लें। ऋषियों के संस्कारों और परंपराओं को अपनाएं।

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आचार्य बालकृष्ण ने लिया बाबा से आशीर्वाद
इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने बालक—बालिकाओं का यज्ञोपवित संस्कार संपन्न कराया तथा इन ब्रह्मचारियों ने यज्ञ किया। और अपने गुरू स्वामी रामदेव को प्रणाम कर उनका आर्शीवाद लिया। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने स्वामी रामदेव को माल्यार्पण कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी रामदेव के अनुयायियों ने उनको तिलक किया और उनकी आरती उतारी तथा उनकी पूजा अर्चना की और उन्हें शॉल औढाकर और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया और आशीर्वाद लिया। स्वामी रामदेव ने अपने अनुयायियों को जी भर कर आशीर्वाद दिया।

 

 

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