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हर साल 20 मई को मनाया जाता है तारा देवी मंदिर का वार्षिकोत्सव, आप किजिए दर्शन मां के, पूर्ण होगी मनोकामनाएं
By Gaurav Kashyap On 19 May, 2018 At 04:18 PM | Categorized As Haridwar, Religion, Uttarakhand | With 0 Comments

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  • गौरव कश्यप

कनखल में मां तारा देवी विराजती हैं अपने वैष्णवी रूप में
हरिद्वार। कनखल नगरी जहां शिव जी की ससुराल के रूप में प्रसिद्ध है और औघड़ बाबाओं, फक्कड फकीरों की साधना स्थली है। वहीं कनखल की यह पावन नगरी देवी के 52 शक्तिपीठों के उद्गम स्थल के अतिरिक्त देवियों के दस महाविद्याओं के स्वरूपों में से देवी मां के दूसरे स्वरूप मां तारा देवी के सिद्ध स्थल के रूप में भी विख्यात है। कनखल के पहाड़ी बाजार में महानंद मिशन में मां तारादेवी वैष्णवी रूप में विद्यमान है जो प्रसिद्ध एवं सिद्ध तारामाता पीठ है। जो भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर उनका कल्याण करती है। जो मां तारा देवी के शांत भाव से पूजा करने वाले साधकों के लिए एक बहुत बड़ा तीर्थ है।
शिव की ससुराल कनखल में पहाडी बाजार में श्री पंचायती उदासीन नया अखाडा की छावनी में शिवजी का मंदिर स्थापित हैं। इस मंदिर से शिवजी की बारात चढ़ी थी। शिव जी इस स्थल पर स्वयं पधारे थे। तभी यहां शिव जी ने स्वयं शिवलिंग स्थापित किया था। शिव जी के इस पौराणिक मंदिर के ठीक सामने गंगा मईया के पूर्वी छोर में गंगा के पावन तट पर मां तारा देवी अपने दिव्य-भव्य-सिद्ध वैष्णवी रूप में विद्यमान है। जो तारामाता का शांत स्वरूप माना जाता हैै।

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महानंद मिशन कनखल में 103 साल पहले 20 मई को तारा देवी ने स्वामी महानंद गिरी महाराज को दिए थे कन्या के रूप में दर्शन
इस सिद्ध स्थल पर तारामाता के उग्र नहीं बल्कि शांत स्वरूप की पूजा होती है। मां तारा देवी के दो रूप माने जाते है। एक उग्र तारादेवी एवं दूसरे शांत तारा देवी। मां तारा देवी के शांत रूप को ही वैष्णवी तारा देवी के रूप में माना जाता है। जिसका पहला एवं अकेला मंदिर कनखल के पहाड़ी बाजार स्थित महानंद मिशन में ही स्थापित है। विश्व में यह पहला अकेला मंदिर हैं जहां मां तारा शांत रूप में स्थापित है। और उस विशेष पवित्र स्थान पर स्थापित है, जहां मां तारा स्वयं कन्या रूप में साक्षात अवतरित हुई थी। इस सिद्ध स्थल की संचालिका स्वामी मां रत्नागिरी ने बताया कि 101 साल पहले 20 मई के दिन मिशन के संस्थापक स्वामी महानंदगिरि ’’पिताजी महाराज’’ को मां तारा देवी ने एक कन्या के रूप में साक्षात दर्शन दिए थे। तभी से महानंद मिशन कनखल के मां तारादेवी मंदिर में हर वर्ष 20 मई को कन्या पूजन एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है।
इस तारा सिद्धपीठ के परिसर में देवों के देव महादेव का भी दिव्य-भव्य-सिद्ध मंदिर स्थित है। इस सिद्धपीठ में तारा माता के वैष्णवी स्वरूप के साथ-साथ शिवलिंग, शिव-पार्वती प्रतिमा, श्री राम दरबार, श्री राधाकृष्ण, भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाए हैं और भोलेनाथ का त्रिशूल स्थापित है और इस सिद्धपीठ में सिद्ध तारामंत्र स्थापित है। जो अत्यंत दुर्लभ है। साथ ही इस सिद्ध तारापीठ में आदिगुरू तेलंग स्वामी, स्वामी महानंद गिरी ’’पिताजी महाराज’’, स्वामी भवानंद गिरी ’’पिताजी महाराज’’ एवं स्वामी विमलानंद गिरी महाराज के पावन चित्र विद्यमान हैं।
मां तारादेवी के वैष्णवी स्वरूप के इस पावन पवित्र सिद्ध तारा माता मंदिर पीठ का सौंदर्यीकरण सन्1997 में स्वामी विमलानंद गिरि महाराज ने करवाया था। जबकि श्री महादेव के मंदिर का सौंदर्यीकरण स्वामी रत्नागिरि ने डेढ साल पूर्व तारामाता और शिवभक्तों की पूजा पाठ-अर्चना एवं भजन कीर्तन हेतु लोककल्याण के लिए करवाया था। तारामाता सिद्ध पीठ महानंद मिशन कनखल मां तारा देवी, शिव जी, हनुमान जी एवं मां गंगा जी के भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई श्रद्धालु साधना के लिए यहां महीनों तक रह कर मां तारादेवी की जप-तप-पूजा करते हैं। सिद्ध साधकों के लिए यह प्रमुख तीर्थ स्थल है।
मिशन की संचालिका स्वामी रत्नागिरी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आगामी 20 मई को मां तारादेवी मंदिर में 103 वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। जिसमें मां तारा देवी के कन्या स्वरूप की पूजा की जाएगी। प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महानंद मिशन के संस्थापक स्वामी महानंद गिरी महाराज और स्वामी भवानंद गिरी महाराज को उनके शिष्यगण ’’पिताजी महाराज’’ के नाम की उपाधि से श्रद्धापूर्वक संबोधित करते हैं।

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